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नौकर-नौकरानी-की-चुदाई-1

सेक्स गुलाम नौकर नौकरानी की चुदाई- 1

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वर्जिन फक कहानी में लड़कों के कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के ने एक लड़की पटा ली. वे दोनों सेक्स के लिए एक रिसोर्ट में गए. लड़की कुंवारी थी, उसकी सील तोड़ कर लड़के को मजा आया.

विजय सरोज की शादी हुए 19 साल हो गए थे.
दोनों 40 की उम्र में पहुंच गए थे.

सेक्स की नीरसता दूर करने उन्होंने अपने नौकर नौकरानी की जोड़ी को अपना सेक्स गुलाम बनने को राजी कर लिया.
नौकर नौकरानी की जोड़ी ख़ुशी से राजी हो भी गयी.

दोस्तो, मैं रतन दत्त एक बार पुनः आपके सामने हाजिर हूँ.
यह कहानी मेरे एक पाठक विजय ने भेजी है, मैं इस सेक्स कहानी को थोड़ा और सेक्सी बनाकर लिख रहा हूँ.

आप इस वर्जिन फक कहानी को विजय की जुबान से सुनें.

हैलो, मैं विजय … एक बड़े शहर के महशूर कॉलेज हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था.
कॉलेज में लड़कों लड़कियों के हॉस्टल थे.

लड़कियों के हॉस्टल में लड़कों का जाना वर्जित था और लड़कियों का लड़कों के हॉस्टल में जाना मना था.
लड़कों के हॉस्टल में गे संबंध और लड़कियों के हॉस्टल में लेस्बियन संबंध होना आम बात थी.

सन 2005 में मैं फाइनल ईयर में था.
मेरी दोस्ती कॉलेज में सरोज से हुई थी.

फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गयी.

सरोज भी फाइनल ईयर में थी. तब हम दोनों की उम्र 21 साल थी.

सरोज सुंदर और सेक्सी फिगर की थी.
हम दोनों का घर एक ही शहर में था. हम दोनों अमीर घराने से थे.

प्यार हो जाने के बाद हम दोनों छुपकर चुम्बन आलिंगन करते थे.

फिर जब इससे हमारा दिल नहीं भरा तो हम दोनों मिलन की कामना करने लगे.

हॉस्टल के सहपाठी ने बताया कि वह अपनी प्रेमिका के साथ कई बार एक रिसॉर्ट में रहा है.
उस रिसॉर्ट में आने वाले लड़के लड़कियों से कुछ नहीं पूछते थे कि उनका आपस में क्या रिश्ता है.
वह रिसॉर्ट हर तरह से सुरक्षित भी है.

मैंने सरोज को बताया तो वह मेरे साथ रिसॉर्ट जाने को राजी हो गयी.

हमारी फाइनल परीक्षा खत्म हुई.
सभी साथी अपने अपने घर जा रहे थे.

हम दोनों ने तय किया कि जाने से पहले दो रात रिसॉर्ट में रहेंगे, फिर घर जाएंगे.
मैंने कंडोम का पैकेट खरीदा, फ़ोन पर रिसॉर्ट बुक किया.

फिर हम दोनों अपने सूटकेस लेकर टैक्सी से रिसॉर्ट पहुंचे.

रिसॉर्ट में सिर्फ मेरा पहचान पत्र देखा गया, सरोज के बारे में नहीं पूछा.

रिसॉर्ट में दूर दूर कॉटेज थे और काफी प्राइवेसी थी.

कमरे में घुसते ही हमने दरवाज़ा बंद किया और एक दूसरे को चूमने लगे.
मैं सरोज के चूचे दबाने लगा.
वह मस्त होने लगी.

जल्द ही मैंने सरोज की टी-शर्ट उतार दी.
टी-शर्ट के नीचे उसने ब्रा पहनी थी, जिसमें उसके भरे हुए शानदार चूचे कैद थे.

मैं ब्रा के आस-पास चूमने लगा, चूचे दबाने लगा.

मेरा लंड उत्तेजना से फनफना रहा था, लग रहा था झड़ जाएगा.

इतने में कमरे की घंटी बजी.
सरोज बाथरूम में चली गयी.

मैंने दरवाज़ा खोला, तो सामने वेटर पानी और ग्लास आदि रखकर चला गया.

थोड़ी देर बाद सरोज नहाकर बाहर आयी.
मैं नहाने चला गया.

बाथरूम में सरोज की ब्रा पैंटी टंगी थी, पैंटी में चूत की जगह गीली थी.

मैंने पैंटी ब्रा सूंघी और मुठ मारकर शांत हो गया ताकि चुदाई में मैं जल्दी न झड़ जाऊं.

कुछ देर बाद मैं नहाकर बाहर निकला.

हमने दो बजे रिसॉर्ट के रेस्तरां में लंच लिया और कॉटेज के सामने की बेंच पर बैठकर सामने की घाटी के प्राकृतिक दृश्य का आनन्द लेने लगे.

हम हाथ पकड़ कर बैठे बात कर रहे थे, तभी हमारी उत्तेजना बढ़ गई और हम दोनों चूमा-चाटी करने लगे.
शाम चार बजे हम दोनों कॉटेज में चले गए.

कॉटेज में घुसते ही हमने दरवाज़ा बंद किया.
चुम्बन आलिंगन के बाद एक दूसरे के पूरे कपड़े उतार कर बिस्तर पर आ गए.

सरोज पांव फैलाकर चित लेट गयी.
उसने कमर के नीचे टर्किस का तौलिया रख लिया.

मैंने वैसलीन की डिब्बी तकिये के नीचे रख ली थी.

मैं हॉस्टल में एक लड़के की गांड मारा करता था उस वक्त मैं अपने लंड पर वैसलीन लगाकर उसकी लेता था तो आदत बन गई थी कि चुदाई के समय वैसलीन की डिब्बी तकिया के नीचे रख लूँ.

अपनी आदत के मुताबिक मैंने लंड पर वैसलीन लगाई और अपने लौड़े को सरोज की चूत में डालने लगा.

मुझे चूत का छेद नहीं मिल रहा था तो मैंने सरोज को इशारा किया कि चुत के छेद पर लौड़े को सैट करो.

उसने मेरे लंड को हाथ से पकड़ कर चुत पर घिसा और फिर छेद पर सुपारा रख दिया.

मैंने झटके से कमर हिलायी, तो वह भी कमर हिला कर लंड से अठखेलियां करने लगी.

इसी तरह से कुछ देर के फोरप्ले से सरोज की चूत गीली हो गई थी और ऊपर से मैंने लंड पर वैसलीन लगाई हुई थी.
तभी अचानक से मैंने झटका दिया तो मेरा पूरा लंड चूत में घुसता चला गया.

एकदम से लंड अन्दर घुसा तो सरोज जोर से चीख उठी.
उसके चेहरे पर दर्द के भाव आ गए थे. आंख से आंसू आने को हो गए थे.
वह तड़फ रही थी.

मैं उसके सर पर हाथ फिराने लगा.
थोड़ी देर में सरोज थोड़ा सामान्य हो गई तो मैं धीरे धीरे उसे चोदने लगा.

कुछ झटके मार कर मैं रूक जाता और उसके एक दूध को अपने होंठों की गिरफ्त में लेकर खींचता और चूसने लगता.

सरोज को मजा आने लगता तो वह अपने दूसरे दूध को चूसने की कहती.
मैं उसके पहले दूध को छोड़ कर दूसरे दूध को चूसने लगता.
फिर लंड को अन्दर बाहर करके सरोज की चुत चोदने लगता.

जल्द ही सरोज को मजा आने लगा और उसने अपने दोनों पैर आसमान की तरफ उठा लिए.
वह लंड की रगड़ से मस्त होकर हल्की हल्की सिसकारियां लेने लगी थी.

इस सबसे मेरे चोदने की गति बढ़ने लगी.
मेरे हर झटके के साथ सरोज के चूचे हिल रहे थे.
बड़ा ही सुंदर दृश्य था.

कुछ देर बाद सरोज का बदन थरथराने लगा.
उसने ‘आह आह सीई …’ की आवाज़ निकाली.
चूत से कामरस निकला और वह पस्त हो गयी.

थोड़ी देर की और चुदाई के बाद मैंने सरोज की चूत अपने वीर्य से भर दी.

वर्जिन फक करके जब वीर्य चुत में चला गया तब जोश को होश आया.

सरोज- विजय गड़बड़ हो गयी, जल्दी में तुम कंडोम लगाना भूल गए! मुझे भी कहने का ख्याल नहीं आया. यदि मैं गर्भवती हो गयी तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी!
मैं- सरोज मुझसे शादी करोगी?

मेरा लंड अभी भी चूत के अन्दर था, शायद मैं पहला मर्द हूँ, जिसने ऐसी पोजीशन में किसी लड़की को शादी का प्रस्ताव दिया हो.

सरोज मुस्कुरा दी और चहक कर बोली- हां मैं राजी हूँ.

हम दोनों ने लंड चुत को एक दूसरे के आलिंगन में रखते हुए लम्बा किस किया.

फिर सरोज बाथरूम गयी.
मैंने देखा मेरे लंड और तौलिये पर खून लगा था.

सरोज के वापस आते ही मैं तौलिया लेकर बाथरूम गया.
अपना लंड धोया, तौलिये को साबुन से धोया और कमरे में पंखे के नीचे सुखाने डाल दिया.

सरोज ने कहा- अभी भी दर्द हो रहा है.
उसने अपने दर्द की बात कहकर दर्द निवारक दवा ले ली.

उस रात हमने दूसरी बार सम्भोग किया. हम दोनों दो रातों के लिए यहां आए थे … पर हम लोग चार रात रुके.
हम लोग ज्यादातर कमरे में रहे और हम दोनों ने कई बार सम्भोग किया.

पांचवें दिन मैंने घर फ़ोन किया कि हमें ट्रेन का रिजर्वेशन नहीं मिल रहा है, मैं अपनी एक सहपाठिन लड़की के साथ टैक्सी से घर आ रहा हूँ.

सरोज ने भी घर फोन करके कहा कि वह अपने सहपाठी लड़के के साथ टैक्सी से आ रही है, ट्रेन रिजर्वेशन नहीं मिला.

हम दोनों टैक्सी का लम्बा सफर तय किया.
पहले हम सरोज के घर गए.

सरोज ने अपनी मां से मेरा परिचय कराया, मां ने मुझे फिर आने को कहा.
अब मैं अपने घर आ गया.

दो दिन बाद सरोज ने मुझे उसके घर बुलाया और अपने पिताजी से परिचय कराया.

मैंने सरोज को अपने घर ले जाकर अपने माता पिता से परिचय कराया.

दस दिन बाद सरोज का फ़ोन आया कि उसे अर्जेंट मिलना है.
हम दोनों एक बाग़ में मिले.

सरोज- मेरा मासिक समय पर नहीं हुआ है. लगता है कि मैं प्रेगनेंट हूँ.
हम दोनों तुरंत उधर से जाकर एक डॉक्टर से मिले.

डॉक्टर ने चेक करके बताया कि बधाई हो सरोज गर्भवती है.
हम दोनों ने यह बात अपने घर वालों को बताकर कहा कि हम दोनों जल्दी ही शादी करना चाहते है.

पहले तो दोनों को डांट पड़ी.

फिर हम दोनों के माता पिता आपस में मिले और एक हफ्ते बाद हमारी शादी हो गयी.

हमारे बंगले के ग्राउंड फ्लोर में मेरे माता पिता रहते थे.
मैं सरोज के साथ फर्स्ट फ्लोर के बेडरूम में रहता था.

मैंने पिताजी का बिज़नेस ज्वाइन कर लिया.

हम सावधानी से डॉक्टर की सलाह लेकर सम्भोग करते, जिससे बच्चे को नुकसान न हो.
सरोज ने लड़के को जन्म दिया तो कुछ समय बाद हमने बच्चे के लिए आया रख ली.

मेरे पिताजी ने 20 की उम्र में प्रेम विवाह किया था.
वे मुझसे 21 साल बड़े थे, मुझसे दोस्त की तरह पेश आते.

जब उनके दोस्त आते, तो मैं बिन बुलाये नहीं जाता.
उन्हें प्राइवेसी पसंद थी.
वे मेरी प्राइवेसी का भी ख्याल रखते.

मेरी शादी के बाद पिताजी ने मुझे नया बंगला बनाने को कहा.

हम दोनों ने अपनी पसंद का बंगला बनवाया.
उसमें दो सर्वेंट क्वार्टर बनाए और बगीचा भी लगाया.

हमारा बच्चा एक साल का हो गया था.

हम नए बंगले में आ गए.
घर में काम करने के लिए नौकर थे.

बच्चा अलग कमरे में आया के साथ सोता और हम दोनों जमकर सम्भोग करते.
हम पारिवारिक दोस्तों के साथ पार्टी करते, माता पिता से मिलने जाते.

सरोज की सहेलियों की किटी पार्टी होती.
हम घूमने जाते.

इंटरनेट पर सेक्स वीडियो देखते और नए नए आसन आजमाते.
अन्तर्वासना और फ्री हिंदी सेक्स कहानी पढ़ते.

हमारी शादी को 18 साल हो गए.
हमारा लड़का दूसरे शहर के कॉलेज हॉस्टल में रहकर पढाई कर रहा था

वैसे तो हमारा सेक्स जीवन रंगीन था, हम आपस की सहमति से यौन क्रीड़ा के नए तरीके आजमाते.
पर कुछ चीजों में हमारी पसंद अलग अलग थी.

मेरी इच्छा थी मूत्र पीने पिलाने की.
सरोज मुश्किल से अपना मूत्र पिलाने को राजी हुई … पर उसने मेरा मूत्र पीने से साफ इंकार कर दिया.

सरोज बाथरूम में दीवार से पीठ टेक कर पांव फैलाकर खड़ी हो जाती और मैं बैठकर चूत में अपना मुँह लगा देता.
फिर सरोज मूतती जाती और मैं उसकी गर्म पेशाब को पीता जाता.

मेरी दाढ़ी मूँछें भी थीं जो सरोज को पसंद थीं.
जब मैं सरोज की चूत चूसता तो मेरी दाढ़ी मूछों से सरोज को गुदगुदी होती.
सरोज कहती- इससे अच्छे तरीके से तो उसकी सहेली हॉस्टल में उसकी चूत चूसती थी.

सरोज लंड अच्छा चूसती, चूसकर वीर्य थूक देती.

एक बार मैंने सरोज को गांड मरवाने के लिए राजी किया, उसकी गांड आस प्लग लगाकर ढीली की.
जब मैं उसकी गांड मारने लगा तो सरोज को सिर्फ दर्द हुआ, मजा नहीं आया.

मैंने कहा- मैं जब हॉस्टल में एक लड़के की गांड मारा करता था, तो वह मजे लेकर गांड मरवाता था!
बल्कि हम दोनों को मजा आता था.

मैं 39 साल का हो गया था.

सम्भोग के समय मुझे झड़ने में काफी देर लगती.
जबकि सरोज जल्द झड़ जाती थी.
वह कहती कि जल्दी ख़त्म करो.

मुझे हफ्ते में 4 बार सेक्स की इच्छा होती.
जबकि सरोज हफ्ते में 1 या 2 बार से ज्यादा सेक्स के लिए राजी नहीं होती.

कभी वह कहती कि तुम सेक्स के लिए किसी लड़की को रख लो, उसकी ले लिया करो!
पर बीमारी, बदनामी आदि बचने के लिए … और उसका बच्चा लाकर मुझे पालने को नहीं बोलना.

मैंने उसकी बात सुनकर इस मुद्दे पर काफी पढ़ा, दोस्तों से बात की और जाना कि इस तरह की छोटी मोटी समस्या बहुत से पति पत्नी के बीच में आती है.

फिर हम दोनों पति पत्नी ने पत्नी अदला बदली के विषय पर भी की चर्चा की.
पर यह बात तो हम दोनों को जरा भी पसन्द नहीं आयी.
हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं.

हमारी घर काम करने वाली नौकरानी बूढ़ी हो गयी थी, उसकी तबियत ख़राब रहने लगी थी.
वह काम छोड़कर जाने से पहले एक जवान नौकरानी आरती को हमारे घर ले आयी.

आरती 21 साल की हल्की सांवली, गठे हुए बदन की माल जैसी दिखने वाली महिला थी.
उसका चेहरा भी काफी अच्छा था.
वह शादी शुदा थी.

आरती हमारे घर काम करने लगी.
वह मेरी पत्नी सरोज से खूब बातें करती थी.

आरती के बदन पर अक्सर मार के दाग दिखते थे.
उससे पूछने पर आरती ने बताया उसकी शादी हुए 3 साल हो गए थे, उसका पति अक्सर उसे पीटता है, पर प्यार भी करता है.
उन दोनों का कोई बच्चा नहीं है.

कुछ महीने बाद आरती एक दफा लगातार दो दिन काम पर नहीं आयी, तीसरे दिन आयी … तो उसने रोते हुए बताया उसका पति उसे छोड़कर दूसरी औरत के साथ चला गया है और बस्ती के कुछ मर्द उसे परेशान करते हैं. उसकी मां भी दूसरे शहर चली गयी है और मां से अब किसी भी तरह से संपर्क नहीं हो पा रहा है.

सरोज को उसके ऊपर दया आ गयी.
हमारे घर में नौकरों के दो कमरे खाली थे.

सरोज ने आरती को एक कमरा दे दिया.
आरती अब हमारे घर में ही रहने आ गयी.

सरोज ने मुझे बताया कि आरती कहती है कि वह बहुत अच्छी मालिश करती है.
सरोज आरती से अपने बदन की मालिश करवाने के लिए कहने लगी.

मैं- पहले आरती की डॉक्टर से पूरी जांच करा लो, उसे कोई बीमारी तो नहीं है. यौन बीमारी की जांच भी करा लेना.
(मेरे मन में था कि सरोज को मालिश करवाते समय उसके हॉस्टल वाले लेस्बियन संबंध की याद आ सकती है)

सरोज आरती को समझा-बुझा कर अस्पताल ले गयी.
उसने अस्पताल में बताया कि आरती की पूरी जांच करनी है कि आरती को बच्चा क्यों नहीं हो रहा है. इसे कोई यौन या अन्य बीमारी तो नहीं है.

डॉक्टरों ने जांच की.
तीन दिन बाद आने को कहा गया.

हम दोनों 3 दिन बाद गए.
रिपोर्ट के अनुसार अभी आरती को यौन या अन्य बीमारी नहीं है, पर उसे किसी कारणवश ब/च्चा नहीं हो सकता.

तीन महीने बाद फिर से चेकअप करने के लिए कहा गया.
यौन बीमारियां हैं या नहीं, यह पक्का पता करने के लिए 3 महीने तक आरती को सेक्स से दूर रहना होगा.

अब उसका आदमी साथ नहीं था तो किसी अन्य पुरुष से उसके सेक्स संबंध होने की कोई गुंजाइश नहीं थी.

आरती मेहनत से घर का काम करने लगी.

मैं एक फल की दुकान से फल लिया करता था.
उस दुकान का नौकर राहुल मुझे चुनकर अच्छे फल देता.

राहुल 21 साल का गोरा सुन्दर दुबला लड़का था.
आरती को हमारे घर आए एक महीना हुआ था.

उस दिन जब मैं राहुल से फल लेकर मालिक को पैसे दे रहा था तो तीन आदमी कार से दुकान पर आए और राहुल को पकड़ कर कार में बिठाने लगे.
राहुल दुकान के मालिक से कह रहा था- मुझे मत भेजो, ये तीनों बहुत तकलीफ देते हैं और पैसे भी नहीं देते हैं.

मालिक गुर्रा कर बोला- उनके साथ चला जा, नहीं तो नौकरी से निकाल दूंगा!
राहुल चला गया.

मेरे पूछने से मालिक बोला- साहब ये आपस की बात है, आप बीच में मत पड़ो.

दो दिन बाद मैं दोपहर को घर जा रहा था, मैंने देखा राहुल अकेला दुकान पर है.
मैंने कार रोकी और राहुल से पूछा- उस दिन वे तीन आदमी तुम्हें कहां ले जा रहे थे और तुम मना क्यों कर रहे थे? डरो नहीं … सच सच बताओ, मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ.

राहुल ने उदास स्वर में कहा- मेरे पिताजी ने दूसरी शादी की तो मुझे घर से भगा दिया. मैं दो साल से इस दुकान में काम कर रहा हूँ. दुकान का मालिक मेरी गांड मारता है. मुझे भी मजा आता है. पर अब मालिक मुझे दूसरे मर्दों के पास भेजता है और उनसे रूपए लेता है. वे लोग मुझे बहुत तकलीफ देते हैं.

मैंने सोचा कि राहुल को गांड मरवाने में मजा आता है. यदि मैं राहुल को अपने घर नौकरी दूं तो मैं उसकी गांड मार सकता हूँ. राहुल को दूसरे मर्दों के अत्याचार भी नहीं सहना होगा.

मैंने उसे नौकरी का प्रस्ताव दिया.
राहुल राजी हो गया.

मैंने उसे अपने घर का पता दे दिया.
राहुल उसी रात दुकान की नौकरी छोड़कर मेरे घर आ गया.

मैंने उसे नौकरों के दूसरे खाली कमरे में रख लिया.

मैंने पत्नी को भी राहुल के बारे में बताया कि यह लड़का बहुत मेहनती है और इसके साथ इस इस तरह की ज्यादती हो रही थी.
उसे मैंने विस्तार से सब बताया … यहां तक कि उसकी गांड चुदाई के बारे में भी बता दिया कि इसका मालिक इसकी गांड मारता है और उसमें इसे मजा आता है.

दूसरे दिन मैंने राहुल की जांच हॉस्पिटल में कराई, उसे यौन रोग नहीं था.
उसकी भी 3 महीने बाद फिर से जांच होनी थी … यह पक्का पता करने कि राहुल को कोई खास यौन रोग तो नहीं है.

मैंने राहुल को यौन रोगों के बारे में बताते हुए कहा कि अब तुम 3 महीने तक सेक्स नहीं करना.

राहुल और आरती मिलकर बंगले का काम करते, बगीचे की देखभाल करते.
इससे आगे की कहानी को मैं अगले भाग में लिखूँगा.

आपको मेरी वर्जिन फक कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
मेल भेजते समय कहानी का नाम अवश्य लिखें. मैंने अनेक कहानियां लिखी हैं.
kamvasnastories69@gmail.com

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